क्या होगा अगर एस्ट्रोनॉट अंतरिक्ष में खो जाए तो? (What Would Happen If An Astronaut Floated away into Space)

क्या होगा अगर एक एस्ट्रोनॉट अंतरिक्ष में खो जाए तो? (What Would Happen If An Astronaut Floated away into Space) 

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What If An Astronaut Get Lost In Space



क्या होगा अगर एस्ट्रोनॉट Space में जाते वक्त, Walk करते वक्त, खो जाए या ISS से दूर चला जाए। 

नमस्कार दोस्तों,  आज के इस आर्टिकल में हम जानने वाले है की क्या हो अगर एक एस्ट्रोनॉट Space में खो जाए। तो मेरे साथ बने रहे अंत तक आज के इस आर्टिकल में यह पता चल जाएगा। दोस्तों अंतरिक्ष हम इंसानों के लिए हमेशा से एक आकर्षण का केंद्र रहा है।जो अंतरिक्ष Lover है उनको हमेशा ही अंतरिक्ष के बारे में जानना अच्छा लगता है। दुनिया में कई प्रकार के Space Mission हो चूका है, जिससे हममे Space के बारे में काफी कुछ जाना है।  आप जानते है की जो एस्ट्रोनॉट अंतरिक्ष घूमने जाते है कोई Mission पर तो उनके मन में हमेशा एक डर बना रहता है की क्या गया अगर हम अंतरिक्ष में कही दूर चले गए तो ? दोस्तों, इस सवाल को महसूस कर के ही कई एस्ट्रोनॉट के रूह तक काँप जाते है। आज हम आर्टिकल में आगे बढे उस से पहले हम जानते है की International Space Station क्या होते है और कौन-कौन देश का अपना स्पेस स्टेशन है। तो आईये अब हम शुरू करते है, अपनी Journey को। 



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स्पेस स्टेशन क्या है और दुनिया के कितने स्पेस स्टेशन पृथ्वी की कक्षा में चक्कर लगा रहे है ?

स्पेस स्टेशन को एक और नाम से जाना जाता है और वो है Orbital Station. जिस प्रकार दुनिया में रेलवे स्टेशन Train गाड़ी के लिए होते है, Metro Station मेट्रो के लिए होते है। ठीक इसी प्रकार Space में गए स्पेस यात्री के लिए अंतरिक्ष में एक मानव निर्मित Station है जिसे हम स्पेस स्टेशन कहते है। अब इस को बनाने का मकसद यही है की 

  1. धरती के वैज्ञानिक अंतरिक्ष के बारे में अच्छे से जान सके स्पेस स्टेशन में रह कर। 
  1. धरती के कई Space Craft जाते है उसके लिए रुकने का स्थान है। 
  1. हमारी धरती पर, अच्छे से नजर रखा जा सके,इत्यादि। 

दोस्तों इस तरह के और भी मकसद को रखते हुए इस स्पेस स्टेशन को बनाया गया है। 


International Space Station :-इस इंटरनेशनल स्पेस Station में कई प्रकार के देश मिलकर यह फैसला लिया है की हम सब अपने देश से जब कोई मिशन करे तो हम उस Space Station का इस्तेमाल कर पाए। इसीलिए इसे International Space Station बोला जाता है। यह स्टेशन Space स्टेशन में ही है। इस स्टेशन पर कई सोलर पैनल लगे हुए है जो एक विधुत का स्रोत है इस ISS में 2 नवंबर 2000 से एस्ट्रोनॉट काम कर रहे है।आप जान कर हरण रह जाएंगे की अभी तक 18 देशों के 230 व्यक्तयों ने  ISS का भर्मण किया है। स्पेस स्टेशन के केबल दो ही बाथरूम है। ऑक्सीजन की Supply Electrolysis द्वारा इस्तेमाल कर के बनाया जाता है। Space Station धरती से नजर आने वाले तीसरे चमकीला वस्तु है। इससे पहले चाँद और शुक्र है।  


निचे हम जानते है की वो दुनिया में कितने Space Station बनाया गया है। 


अगर हम बात करे 2018 तक तो दो ही Space Station पृथ्वी की कक्षा में है पहले : International Space Station  और Tiangong-2 है। 


पिछले स्टेशनों में Salyut Series,Skylab,अल्माज़,मीर और हाल में Tiangong-1 शामिल है। आप जानते है की आप स्पेस स्टेशन को धरती पर से भी देख सकते है। वो भी नग्न आखों से। इस स्पेस स्टेशन में जो देश के एजेंसीज कर करती है वो है :NASA, European Space Agency,Roscosmos State Corporation (Russia ),Japan Aerospace Exploration और लास्ट में The Canadian Space Agency  





तो दोस्तों ये तो थे स्पेस स्टेशन के बारे में कुछ अनोखी अनसुने बाते अब हम अपने प्रश्न पर वापस आते है और जानते है की “अगर कोई अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष में खो जाए तो ?”

अगर मैं आप को Clearly बताऊँ तो ऐसा कुछ भी नहीं होने वाला, अब मैं ऐसा क्यों बोल रहा हूँ उसका कारन यह है की नासा जैसे Agency जो स्पेस स्टेशन के प्रोजेक्ट पर काम करती रहती है। वो यह सुनिश्चित करते है की जब भी कोई एस्ट्रोनॉट स्पेस में जाए तो उसे एक Advance Space Suit Provide कराया जाए। आप जानते है की जो एस्ट्रोनॉट स्पेस में जाते है उनके Insurance किये जाते है ताकि अगर कोई कारन वश उन एस्ट्रोनॉट की Death हो जाए तो उनके Family को दिक्कत न हो। चुकी आज तक मुश्किल से ही ऐसा हुआ है। 


अब मान लीजिये की कोई एस्ट्रोनॉट स्पेस Walk पर जाते है या कोई काम के कारन स्टेशन से बाहर तो उससे एक ISS  से Attach किया जाता है। ( स्पेस स्टेशन के बाहर एक 25 मीटर स्टील की रस्सी के सहारे ). एस्ट्रोनॉट को स्टील के मजबूत रस्सी के सहारे बांधा जाता है ताकि अगर काम करते वक्त वो इधर-उधर हो जाए तो उससे आसानी से खींचा जा सके। इस रस्सी की ताकत 550 तक के Pressure को भी झेल सकती है।अब मान लीजिये की अगर कुछ वजह से ये रस्सी टूट जाए तो, अगर वो रस्सी टूट जाए तो एस्ट्रोनॉट SAFER (Simplified Aid For Eva Rescue ) का इस्तेमाल कर सकता है जो एक Jet Pack System है जिसके मदद से Instant Acceleration Generate किया जा सकता है।


आप जानते है की स्पेस में Gravity नहीं है इसीलिए वहाँ पर हमारा  Weight भी महसूस नहीं होगा और अगर रस्सी से हटने के बाद हाथ-पाव भी चलाते है तो भी कोई फर्क नहीं पड़ने वाले और वो एस्ट्रोनॉट के लिए और बुरा होगा क्योकि Pressure की वजह से एस्ट्रोनॉट उस तरफ चलने लगेंगे जिस तरफ Pressure है। अब अगर एस्ट्रोनॉट इस्तेमाल करते है SAFER तो Chances है की वो वापिस स्टेशन में आ जाये क्योकि इस SAFER की मदद से हमे एक Mobility मिलती है और हम इधर-उधर जा सकते है। अब मान लीजिये की यह SAFER भी काम ना करे तो, तो दोस्तों फिर एक आखरी उम्मीद बचती है और वो है Rescue Operation By Astronauts. लेकिन कुछ Limits तक क्योकि Agencies एक एस्ट्रोनॉट के चलते पूरी Team को नहीं फॅसा सकती है। वैसे अभी तक तो इस प्रकार के रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए Advance Technology भी नहीं आये है लेकिन आशा करते है की भविष्य में जरूर ऐसा हो सकेगा। 


अब आपके मन में एक प्रश्न जरूर होगा की आखिर होगा क्या उन एस्ट्रोनॉट के साथ जो इन Rescue Mission, SAFER और स्टील के रस्सी से बच नहीं पाए। 


अब आप जानते है की स्पेस में Gravity नहीं है लेकिन धरती की एक अपनी Gravity है। जो उस एस्ट्रोनॉट को खींच सकती है और वो एस्ट्रोनॉट धरती से Collab भी कर सकते है और इस प्रकार उनकी मृत्यु धरती के वायुमण्डल में ही हो जायेगी क्योकि Friction है जिसके कारन वो जल जायेंगे और इस प्रकार की घटना अतीत में घट भी चुकी है। वैसे आप को बता दूँ वो एस्ट्रोनॉट स्टील की रस्सी के बेकार होने के कारन या टूटने करण उसी Direction और उसी रफ़्तार से आगे बढ़ते रहेंगे एक बात बता दूँ की  स्पेससूट की वजह से वो एस्ट्रोनॉट 8 घंटे तक जिन्दा रह सकते है क्योकि उसके बाद ऑक्सीजन उस में से खत्म हो जायेंगे। और इस कारन वो भेहोश हो जायेंगे और फिर एस्ट्रोनॉट की कुल्फी बन जाएगी क्योकि स्पेस -271 डिग्री सेल्सियस ठंडा है।अब हम उस कारन को जानते है की अगर Space Suit किसी कारणवश ख़राब हो जाए तो क्या हो सकता है।


अगर हम मान के चलते है की Space Suit ख़राब हो चूका है तब यह हो सकता है की एस्ट्रोनॉट के खून उबलने लगेंगे क्योकि स्पेस में कोई Air Pressure नहीं है। और,इस कारन उनका शरीर फूल जाएगा और उनकी Death हो जायेगी। 


नासा ने हाल ही में चंद्रमा की सतह पर पानी के सबूत पाए हैं?

 
आप को बता दूँ की हाल में ही नासा द्वारा पुष्टि हुआ है की चंद्रमा पर पानी मिला है।इंसान अंतरिक्ष में जीवन की खोज में जुटा है। भले ही अभी तक हमें ब्रह्मांड में अपना साथी न मिला हो, हमारे सबसे करीबी पड़ोसी के पास उत्साहित करने वाली कोई चीज जरूर मिली है। अमेरिका की स्पेस एजेंसी NASA के Stratospheric Observatory for Infrared Astronomy (SOFIA) ने पुष्टि की है कि पहली बार सूरज की रोशनी में चांद पर पानी की खोज की गई है। इस खोज के साथ ही इशारा मिला है कि चांद की सतह पर पानी सिर्फ ठंडी में नहीं, हर जगह मौजूद हो सकता है।अब हम बात करते है कैसे और कब मिला पानी के साबुत।  

​चांद पर क्या-क्या मिला?
क्या होगा अगर एस्ट्रोनॉट अंतरिक्ष में खो जाए तो? (What Would Happen If An Astronaut Floated away into Space) इस आर्टिकल में आगे देखेंगे की ​चांद पर क्या-क्या मिला?
SOFIA ने Clavius Crater पर पानी के मॉलिक्यूल की खोज की है। यह धरती से दिखने वाला सबसे बड़ा क्रेटर है जो दक्षिणी गोलार्ध पर है। इससे पहले चांद की सतह पर हाइड्रोजन का एक फॉर्म मिला है लेकिन वैज्ञानिक पानी और उसके जैसे हाइड्रॉक्सिल (OH) में फर्क नहीं कर पा रहे थे। यहां से मिले डेटा में पानी की मात्रा 100-412 पार्ट्स पर मिलियन मिला था। यह चांद की एक क्यूबिक मीटर मिट्टी में पानी की एक बोतल के 28 ग्राम के बराबर है। NASA हेडक्वॉर्टर्स के साइंस मिशन डायरेक्टोरेट के ऐस्ट्रोफिजिक्स डिविजन के डायरेक्टर पॉल हर्ट्ज ने कहा है, ‘हमें संकेत मिले थे कि H2O, जैसा हमें पता है, वह चांद के सूरज से रोशन होने वाले हिस्से में है। अब हमें पता है कि यह वहां मौजूद है।
​आखिर कैसे की गई थी खोज?
आपको बता दूँ की SOFIA को जो नतीजे मिले हैं वह सालों की रिसर्च के आधार पर पाए गए हैं। 1969 में Apollo ऐस्ट्रोनॉट्स जब पहली बार चांद से वापस आए थे, तब माना जा रहा था कि यह पूरी तरह से सूखा है। NASA के Lunar Crater Observation and Sensing Satellite जैसे दूसरे ऑर्बिटल और इंपैक्टर मिशन की मदद से 20 साल में यह पाया गया कि चांद के ध्रुवों पर बर्फ है। वहीं, Cassini मिशन और Deep Impact comet mission के अलावा भारत की स्पेस एजेंसी ISRO (इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन) के चंद्रयान-1 मिशन और NASA के Infrared Telescope Facility की मदद से चांद की सतह को और बारीकी से देखा गया और सूरज की रोशनी पाने वाले हिस्से में पानी के संकेत मिले। हालांकि, यह नहीं पता लगाया जा सका था कि यह H20 था या 0H. SOFIA की मदद से चांद पर देखने का नया तरीका मिला है। इस मॉडिफाइड Boeing 747SP जेटलाइनर में 106 इंच के डायमीटर का टेलिस्कोप लगा है और यह 45,000 फीट की ऊंचाई पर है। धरती से उठने वाले 99% वाष्प (water vapor) से ऊपर उठकर यह इन्फ्रारेड ब्रह्मांड को और साफ-साफ देख सकता है। यह अपने Faint Object Infrared Camera for Sophia Telescope (FORECAST) की मदद से खास 6.1 माइक्रॉन की वेवलेंथ पर पानी के मॉलिक्यूल खोज सका। सूरज की रोशनी में Clavius Crater पर हैरान कर देने वाली मात्रा में पानी मिला।


आपको कैसा लगा जान कर प्लीज शेयर करे की आपको अगर भविष्य में चाँद पर जाने का मौका मिलेगा तो आप जाएंगे लेकिन खर्च आप देख लेना। 

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तो दोस्तों ये सब  वो संभावना है जो हो सकते है, लेकिन हमे चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है क्योकि Space Agencies इस तरह के Serious और Critical Situation पर हमेशा काम करती है। So,Don’t Worry !


अंत में, मैं आशा करता हूँ की आप समझ गए होंगे की क्या-क्या हो सकता है अगर कोई एस्ट्रोनॉट स्पेस में खो जाते है। तो बस अब हम एक दूसरे को See You Later कहते है। 


Posted By Ainesh Kumar
  

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