PHOBOS और DEIMOS के बारे में कुछ FACTS | Ainesh Kumar

PHOBOS और DEIMOS के बारे में कुछ FACTS | Ainesh Kumar


MANGAL  GRAH  KE   DO  RAHASYAMAY  CHAND  

( PHOBOS & DEIMOS)

 
LET’S GET  STARTED !!!

आओ पढ़ते है … 

हमारा  पहला  विषय  जो  है  वो  है  ”  फोबोस ” का !  लेकिन  उस  से  पहले   एक BONUS FACT…
 
कि  ” जापान  एक  मिशन  लॉंच  करेगा  जो   2024   में   है ,जिसमे  हम  जान  पाएंगे  फ़ोबोस  और  डीमोस  
 
के  बारे  में  और  ज्यादा   कुछ  तथा  ये  मिशन  फोबॉस  और  डीमोस से  डाटा  कलेक्ट कर वापिस  आएगा      
2029  में।  और  उस  मिशन  का  नाम   है  MMX( MARS MOONS  eXPLORATION  MISSION).

1. PHOBOS (“फ़ोबोस “)

 
फोबोस की खोज 18  अगस्त, 1877 को आसफ हॉल द्वारा की गई थी।
मंगल  ग्रह  के  दो  प्राकृतिक  उपग्रहों  में  से  सबसे  बड़ा ,नज़दीकी 
उपग्रह  है।  इसका  नाम  यूनानी  देवता , फ़ोबस  जिसका  मतलब  डर
तथा  आतंक  है   होता  है , के  नाम  पर  रखा  गया  है  जो  एरिस  का  
बेटा  था।
            

फोबोस  तथा  डेमोस  दोनों  ही  भाई  है।  चूकि , इसका नामांकन 
यूनानीओं के  देवता के नाम  पर  रखा गया। फ़ोबोस   मंगल  ग्रह  के  काफी  नजदीक  है  और  इसी  वजह  से  यह दिन   में  दो  बार  मंगल  ग्रह  की  परिक्रमा  करता  है। फोबोस  लाल ग्रह  की  सतह  से  केवल  6,000 किमी  ऊपर  की  यात्रा  करता है; पृथ्वी  की  तुलना  में  चंद्रमा  384,400  किमी  ऊपर  है।इसका व्यास  17 x 14 x 11 मील  के  बराबर  है। कहा  जाता   है   कि  फोबोस  हर  100  साल  में  6 फ़ीट  की  दर     से  मंगल  की  तरफ  आ  रहा  है, और  इसी  वजह  से  कहा  जा  रहा है  कि  50 मिलियन  बाद  फोबोस  मंगल  ग्रह  का  रिंग  बन  जायगा और  उसी  तरह  चककर  लगाएगा  जैसे  शनि  ग्रह  का है; या  तो फिर  मंगल  से  टकरा  जियेगा  जिस  वजह  से  डीमोस  भी  दूर  चला जायेगा। चुकी 
डेमोस  और  फोबोस  एक  ही  तरह  की  सामग्री  से बना  है  जो  बौने  ग्रहों  और  क्षुद्रग्रहों  को  बनाते  हैं,  जिन्हें  टाइप  I  या   II  कार्बोनेसस  चोंड्रेइट  कहा  जाता  है।

फ़ोबोस  पर  तापमान  का  भी  बहुत  अंतर  है  या  ऐसे  कहे की  फोबोस  पर   दिन  का  तापमान  कुछ  और  रात  में  कुछ और   होता  है  ; फोबोस और  डीमोस  का  तापमान लगभग  समान है   के  उच्च  तापमान  को  -4 डिग्री सेल्सियस (सूरज की तरफ ) और -112  डिग्री  सेल्सियस (छांकित  की तरफ )  पर  मापा  गया। फ़ोबोस  4  घंटे 17  मिनट  लेते  है  मंगल  के  पुरे   एक  चककर लगा  लेता  है। चंद्रमा  पश्चिम  में  उगता  है,  तेजी  से  आकाश  में  घूमता  है,  और  पूर्व  में  प्रत्येक  मार्टियन  दिन (प्रत्येक 11 एच 6 मिनट)  में  दो  बार  सेट  करता  है। ये  दो  बार चक्कर  लगाता  है  क्यूकि , इसका  ये  मंगल  ग्रह से  भी  तेजी  से  घूमता  है। फ़ोबोस   पर   9 km   का   क्रेटर   भी   मिला   है ; जो  पुरे  चाँद  का आधा  है।  क्रेटर को स्टिकनी कहा जाता है। एक  मज़ेदार  बात  ये  है  की  फोबोस  पर  जाने  पर  वजन  कम  हो  जाता  है ;eg : 150 पौंड  के  व्यक्ति   फ़ोबोस  पर  2. 2  औंस का  हो  जायेगा ,यह  चंद्रमा  के  छोटे  आकार  और  इसके  बहुत 
कमजोर  गुरुत्वाकर्षण  के  कारण  होता है।
                        

# फोबोस  AND  डीमोस  के   बारे  में  कुछ  तथ्य 

1. दोनों  चंद्रमा  केवल  मंगल  ग्रह  की  ओर  एक  पक्ष  दिखाते  हैं। इसे  “ज्वार-बंद”  के  रूप  में  जाना  जाता  है। 
 
2. डीमोस  और  फोबोस  पर  किसी  भी तरीके  का  वातावरण  नहीं  है। आप  समझ  सकते  है  स्तिथि  वह  की;
 
3.  फोबोस  और  डीमोस  दोनों  ही  C -TYPE  वाले  क्षुद्रग्रह  के नजदीक  है; वैज्ञानिक  आज  भी  पता  नहीं  लगा  पाया  की फोबोस  और  डीमोस  कैसे  है  वहाँ   पर ; और  क्या   फोबोस और डीमोस  क्षुद्रग्रह  बेल्ट  में  बने  थे  या  बृस्पतिग्रह  ने  उसे खींच  कर  मंगल  की  कक्छा  में  फ़ेंक  दिया। सवाल  कई  सारे   है  मगर  जवाब  नहीं। 
 
4.  अधिकांश  चंद्रमा  आकार  में  गोलाकार  होते  हैं,  जबकि  डीमोस और फोबोस विषम रूप से ढेलेदार होते हैं। 
 
5.  फ़ोबोस  की  सतह  को  ढंकने  वाली  महीन  धूल  को “रेजोलिथ”कहा  जाता  है।
 
6.  डीमोस  और  फोबोस  को  कई  बार  मिशन  से  देखा  गया   जैसे पहला  मेरिनर – 9  से  1971  में  देखा  गया ; विक्निंग ओर्बिटस  और  द  सोवियत  फोरवोट  तथा  और  भी। 
 
7.  एक दिन फोबोस और डीमोस एक अंतरिक्ष स्टेशन के रूप में इस्तेमाल  किया जा सकता ह; ताकि वे मंगल को करीब से जा सकें। क्यूकि , उस  चाँद  पर  कम  ग्रेविटी  है  और  जो लैंडिंग के लिए  ठीक  होता है। 
 

2. DEIMOS(“डीमोस”)

 
12  अगस्त, 1877  को  चंद्रमा  डीमोस  की  खोज  हुई , और उसके  छह दिन  बाद  ही  उन्होंने  मंगल  के  दूसरे  चंद्रमा फोबोस की खोज की।डीमोस  चाँद  एक  तारे  के  समान  लगता  है ; जब  आप  उस  के ऊपर  रहेंगे। और  इस  वजह  से  इस   पर  सूरज की  रोशनी पड़ने  के  बाद  ये  शुक्र  के  समान  ही चमकता है। ये  मंगल  का  पूरा  चक्र  30. 4  घंटे  में  पूरा करता  है ; इस  से ये  पता  चलता  है  कि  ये  दूर  जा रहा  है  तथा  फोबोस  पास  आ रहा है। डीमोस  के  पास  दो  बड़े  क्रेटर्स  है  स्विफ्ट और वूटेलियार जिसमे  से  स्विफ्ट  का  व्यास 1. 1  KM  है  तथा  वूटेलियार का व्यास 1. 9 KM  है। 
                        

क्या  है  फोबोस तथा डीमोस का इतिहास ???

1877  में , एक  अमेरिकी  खगोलशास्त्री  आसफ  हॉल  मंगल ग्रह के     बारे  में   अध्ययन  कर  रहे  थे। वह  मंगल  ग्रह  के  चारों  ओर  चंद्रमा की परिक्रमा करने के लिए अपने शोध को देने के लिए लगभग तैयार थे  इसी  बीच उन्होंने  पहले  चंद्रमा, डिमोस  की  खोज  की  और फिर  छह  रात  बाद  उन्होंने  फोबोस  की  खोज  की। दोनों  चंद्रमा मंगल   ग्रह  के  इतने  करीब  थे  कि  वे  अक्सर  मंगल  ग्रह  की चकाचौंध  से  छिपे  रहते  थे। फोबोस , डेमोस से केवल 7.24 गुना बड़ा था।हॉल  ने  युद्ध  के  पौराणिक  ग्रीक  देवता  एरेस  के  बेटों  के  लिए चंद्रमाओं   का   नाम   तय   किया। मंगल  युद्ध  का  रोमन  देवता  है। फोबोस  का  मतलब  घबराहट  या  डर  है, और हमे “फोबिया” शब्द  का  मतलब पता है । डिमोस  का  मतलब  है  कि  हार  के  बाद  भाग  जाना।1950  और 1960  के  दशक  में, खगोलविज्ञानों  ने  पाया कि     फोबोस  की  कक्षा  क्षय  हो  रही  थी  और  कुछ  ने  सोचा  कि फोबोस  कृत्रिम (MAN MADE) था।  पर  कुछ  लोगो ने इस तथ्य पर 
सटीकता  दी  जिनकी उस  समय  चलती  थी। फिर  लोगो  ने  तथ्य  को  माना।   पर  आज  भी  इस  चाँद  पर  कई 
अजीबों  गरीब  पिस्थितियाँ   आती  रहती  है। 


मेरे प्यारे दोस्तों तो बस आज के लिए इतना ही और मैं आप सब से उम्मीद करता हूँ की आप ने मेरे द्वारा लिखी हुयी आर्टिकल को आप पसंद करते होंगे और कुछ सीखते भी होंगे …तो दोस्तों आखिरकार  मैंने  अपना  काम  किया अब  आप  की  बारी  है  इसे  पढ़े  तथा  SHARE  करें !!!  


इसी  के  साथ  मैं  Ainesh  Kumar  आप  सब से विदा लेता हूँ और आशा करता हूँ की आप को ये  Blog  पसंद आयी होगी।
      
आपका  धन्यवाद !!!

Posted By Ainesh Kumar

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