चंद्रमा की उत्पत्ति पर भ्रम/परिकल्पना – Confusion Over Moon Origins- How Was The Moon Formed ???

पृथ्वी को उसका चंद्रमा कैसे मिला यह एक लंबा बहस वाला सवाल है। विशाल प्रभाव सिद्धांत (The Giant Impact Theory Hypothesis ) – जिसमें कहा गया है कि चंद्रमा की उत्पति एक प्रारंभिक युवा पृथ्वी और थिया नाम की एक दूसरी ग्रह से टकराने से हुई थी। यह कहा तक सत्य है आज हम इस Article में जानेंगे …



दोस्तों आप ने भी अद्भुत चाँद का दीदार तो किया ही होगा, हमारा चाँद धरती से अति – सुन्दर दिखाई देने वाला एक Important पिंड है। अलग- अलग धर्म के लोग चाँद को अलग-अलग मान्यता और आदर-भाव से देखते है और धार्मिक ग्रंथो में तो चाँद को पूजनीय बताया गया है। लेकिन आप के मन में कभी-ना -कभी ये प्रश्न तो आता ही होगा की आखिर चाँद के बनने के पीछे क्या राज है। और चाँद हमारे इतने पास क्यों है और बाकी पिंड इतने दूर-दूर क्यों है,इत्यादि। 

तो दोस्तों आप चिंता ना करे क्योकि आज मैं इस में वो सब ” परिकल्पना “
और “अवलोकन “बताऊंगा जो चाँद के अस्तित्व को यहाँ होने के लिए बताते है। 

हमारी पृथ्वी और बाकि Solar System के ग्रह का अस्तित्व 4.5 अरब साल पहले आया था,लेकिन इन सभी ग्रहो को Proper Shape में बनने के लिए कई करोड़ साल लगे और Finally आज हम अपने Internet के माध्यम से सभी ग्रहों को 3-D में देख सकते है वो भी Natural Shape में। जो कई सालों के कठिन प्रस्तिथियों से बने है। 

तो मैं Ainesh Kumar आज का Topic शुरू करता हूँ जिसका शीर्षक है “‘ चाँद के  निर्माण  पर अलग -अलग परिक्लपनाएँ और भ्रम  “”

आईये शुरू करे ——👉👉👉

सबसे पहले हम जानते है वो Theory जो सबसे ज्यादा चर्चित में है। आज हम इसमें वो 4  Important Theories जानेंगे जो चाँद की उत्पत्ति को बताता है। 

1. विशाल प्रभाव सिद्धांत परिकल्पना(The Giant Impact Hypothesis) 

4.5 अरब साल पहले, Theia ( थिय्या ) नाम की एक ग्रह हमारी धरती से टकराई थी जिसका आकर वैज्ञानिक कहते है की Mars के बराबर थी। (Theia ग्रह की रफ़्तार 15 km/sec थी जो एक बन्दुक से निकली Bullet के रफ़्तार से 20 गुणा तेज थी ) उस टकराओ के कारन हमारी पृथ्वी के चारों ओर अनगिनत छोटे-छोटे चट्टानों के टुकड़े घूमती रही और वो आज के शनि ग्रह के छल्ले( Ring ) की तरह एक घुमावदार Disk बन गया था,जो पृथ्वी पर लगातार कई वर्षों तक Asteroids बरसाता रहा। और इसी अनगिनत छोटे-छोटे चट्टानों के टुकड़े से ही हमारा चाँद बना जो हमारी पृथ्वी के व्यास से थोड़ा ही छोटा था जिस वजह से उस समय पृथ्वी अपने अक्ष पर ही अडिग थी। और चाँद का यूँ बड़ा होने की वजह से ही हमारी धरती पर अग्नि के लावा कई Feet उच्चे उड़ते रहे जिस वजह से हमारी धरती कई वर्षो तक रहने योग्य नहीं बन पाई उस समय एक दिन 6 घंटे के होते थे लेकिन कुछ कारणों से चाँद हमसे दूर चले गए और बाद में समय के साथ अग्नि के लावा शांत हुए और आज हमारा एक दिन 24 घंटे के होते है। 

In Short :- विशालकाय प्रभाव सिद्धांत – यह विचार है कि पृथ्वी पर लगभग 4.5 बिलियन वर्ष पहले एक प्रलयकारी टक्कर हुई और पृथ्वी के लगभग आधे आकार के बीच एक प्रोटोप्लेनेट ने पिघली हुई चट्टान, गैस और मलबे की एक डिस्क बनाई जो चंद्रमा को बनाने के लिए समेकित हुई। 

                                          

योकोहामा में The Japan Agency For Marine-Earth Science and Technology के एक ग्रह वैज्ञानिक नात्सुकी होसोनो और उनकी टीम ने कंप्यूटर मॉडल विकसित किए, जो पृथ्वी को मैग्मा के एक सागर से कवर करते हैं, जो कि ग्रह के गठन के अधिकांश मॉडल ग्रह के जन्म के तुरंत बाद सुझाव देते हैं। उन्होंने अगली बार विश्लेषण किया कि जब पृथ्वी के द्रव्यमान के दसवें हिस्से के बारे में मंगल के आकार की चट्टान ने इस पिघले हुए प्रोटोप्लेनेट को मारा था।

Hosono ने बताया की “” चंद्र गठन पर पहले काम ने मूल रूप से मैग्मा सागर के प्रभाव को नजरअंदाज कर दिया था। हमारे शोध ने निष्कर्ष निकाला है कि चन्द्रमा के विशालकाय प्रभाव के लिए मैग्मा महासागर सबसे महत्वपूर्ण चीजों में से एक है। ””

दोस्तों अंत में मैं इस Theory के बारे में यही कहना चाहूंगा की इस Theory को बहुत Relate किया जा रहा है और हर पहलु में ये सिद्धांत सिद्ध हो रहा है। अब हम आगे बढ़ते है और जानते है दूसरी Theory …

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2. कब्जा सिद्धांत ( The Capture Theory )

दोस्तों जैसा की मैंने बताया है की 4.5 बिलियन साल पहले हमारी धरती और बाकी पिंड भी अस्तित्व में आ रहे थे। उस समय ये जरुरी नहीं था की धरती की तरह बाकी पिंड की भी एक निश्चित सिमा तय हो गयी हो क्योकि उस समय सारे पिंड इधर-उधर भटकते रहते थे जब तक की कोई उस पिंड से बड़ा और ज्यादा Gravity के प्रभाव से उसे खींच ना ले। मैं ऐसा इसी लिए कह रहा हूँ क्योकि चाँद पर जो कई तरह के दाग-और-धब्बे है वो हो सकता है की कई तरह के छोटे-छोटे पिंडो और Asteroids के प्रभाव से हुआ हो। 

The Capture Theory के मुताबिक जो आज चाँद हमसे सबसे करीब है वो 4.5 बिलियन साल पहले हमारे सोलर System में कही और बने होंगे और ये (चाँद ) इधर-उधर भटक रहे होंगे तब हमारी पृथ्वी की Gravity ने उसे अपनी ओर खींच लिया हो और तब से वो हमारे साथ है चाँद के रूप में।

वैज्ञानिक मानते है की अगर चाँद कही और से आया होता तो हमारी धरती और चाँद के जो Components और तत्व है वो अलग होते।लेकिन, Apollo 11 मिशन में गए हुए एस्ट्रोनॉट्स जो Components और तत्व लाये वो 80 % तक Same थे। इस सारे,परिकल्पना के बाद वैज्ञानिकों ने इस सिद्धांत को गलत बताया।                                             

3. विखंडन सिद्धांत ( The Fission Theory )

तो दोस्तों हम ने दो Theories तो देख लिए और जान भी लिए लेकिन अब भी प्रश्न का उतर ठीक-ठीक नहीं मिल पा रहा है। 
आइए अब जानते है एक और सिद्धांत के बारे में जिसका नाम है The Fission Theory .  
 
विखंडन सिद्धांत: इस सिद्धांत का प्रस्ताव है कि चंद्रमा कभी पृथ्वी का हिस्सा था और किसी तरह सौर मंडल के इतिहास में पृथ्वी से अलग हो गया। और कुछ वैज्ञानिक कहते है की आज व वर्तमान के प्रशांत महासागर ही वो भाग है जो चन्द्रमा के उत्पत्ति के लिए उत्तरदाई है जो सबसे लोकप्रिय स्थल है जहाँ से चंद्रमा आया था।
 
यह सिद्धांत कहा तक सत्य है हम नहीं कह सकते है लेकिन, अगर इस प्रकार होता तो आज चाँद इतना दूर कैसे चला गया है ????
 
और हमारी धरती के धरातल अभी भी सांस ले रही है लेकिन चाँद के अंदर कोई भी इस प्रकार की घटनाएं नहीं देखि गई है। 
 
 
चलो दोस्तों इस सिद्धांत को हम यही तक रखते है और आगे बढ़ते हुए और सिद्धन्तो सिद्धांतो को जानते है और समझते है…
 
4. संक्षेपण सिद्धांत ( The Condensation Theory )
 
दोस्तों इस सिद्धांत के अनुसार पृथ्वी और चाँद दोनों Nebula में से बने थे। और बनने के बाद पृथ्वी के Gravitational Force की वजह से चाँद हमारी पृथ्वी के इर्द-गिर्द Rotate करने लगे। 
 
दोस्तों जो सिद्धांत मैंने ऊपर बताया है उस सिद्धांत को The Condensation Theory कहते है। Robert Jastrow ने ही इस सिद्धांत को दिया था। 
अब दोस्तों मेरे हिसाब से ये जो परिकल्पना दी गयी है वो निश्चित ही सत्य हो लेकिन मेरे अंदर ये सवाल है की अगर दोनों एक ही जगह और एक ही तत्व से बने है तो 20 % अंतर क्यों है ? क्या जब चाँद बना होगा उस समय भी अभी जितना ही दुरी था चाँद का अगर नहीं तो ऐसा कैसे हो सकता है की एक साथ बनने के बाद भी इतना Difference ?? 
 
 
दोस्तों आप मुझे Comment में बताये की आप क्या सोचते है इस सिद्धांत के बारे में और इस परिकल्पना के बारे में। 
 
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तो दोस्तों अब मैं Ainesh Kumar आप सब से विदा लेता हूँ और आशा करता हूँ की चाँद के बनने में जो-जो सिद्धांत मैंने यहाँ लिखा है वो आपको अच्छे से समझ में आये होंगे और आप को कुछ Question के भी Answer ,मिल गए होंगे। 

अगर आप किसी और विषय के बारे में जानना चाहते है तो Please Comment में आप बता सकते है। अब आप सब से विदा लेने का समय आ गया है। अतः आप सब का धन्यवाद पूरा Article पढ़ने के लिए। 

Posted By Ainesh Kumar 


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